बज्जिका भाषी गान—रामचन्द्र महतो कुशवाहा

  • Wartman Kal Dainik
  • / समाचार /
  • २०७८ बैशाख ११, शनिबार (४ साल अघि)
  • ५ पटक पढिएको
बज्जिका भाषी गान—रामचन्द्र महतो कुशवाहा


बैशाख ११ गते

बज्जिका भाषा हए मधुर
सबलोग बुझैय भरपुर
बोलेमे सहज, पढेमे सहज
लिखेमे सहज, सुनेमे सहज

       बज्जिका क्षेत्र बहुुतदुर तक
       चार जिलामे  छबले  हए 

दोसर भाषाके रूपमे सहज
अपन पहचान बनैले हए

बज्जिका भाषाके किताब स्कूलमे 
पढल,  लिखल  व्यक्तिके   हाथमे 
साहित्यकार लोग कलम चलारहल 
बज्जिका भाषाके हिम्मत बढारहल

कथा, कविता, गीत आ संगीत
कहानी, नाटक आ उपन्यास
जनमानसके घरघरमे पढ रहल
नेपाल आ भारत बासी सब

बज्जिका  भाषामे   पढलक   मधेशी
बज्जिका  भाषासे   बढलक   मधेशी
सबके बुझेबाला, सहजरुपमे बोलेबाला
मातृभाषा  हए  हमर  बज्जिका भाषा ।

रामवन, हाल ः मलङवा, सर्लाही

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