बज्जिका कविता सबेरे उठू—रेणु गुप्ता

  • Wartman Kal Dainik
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  • २०७८ बैशाख ११, शनिबार (४ साल अघि)
  • ४ पटक पढिएको
बज्जिका कविता सबेरे उठू—रेणु गुप्ता


बैशाख ११ गते
खूब सबेरे उठू
हाथ मुह धोऊ
कुला गलाली करू
आलसके भगाके
पढे लिखे बैठू ।

भात, रोटी दुनू निमन
सागसब्जी, दूध, दही
खूब बहुता खाऊ
सफा कपडा लगाऊ
सबेरे स्कुल जाऊ ।

खूब पढू खूब लिखू
बनू इमानदार
नकरू खराब काम
रहू होसियार ।

माई बाबुके कहल मानू
गुरुके उपदेश
सभेके आशीर्वाद रही
ब्रह्मा, विष्णु, महेश ।

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